Life in metro
धरा – तीन दोस्त- आकाश,
रीतु, सपना,
सारा- धरा की बहन
राजीव चौक से सेक्टर 16 नोएडा
दिल्ली, मेट्रो- मेट्रो के अंदर कुछ भी खाना वर्जित है, डॉन्ट इट इन
मेट्रो, माइंड द गैप, यमुना बैंक जाने वाले यात्री यही उतर जाएं, .....
धरा- बहन(सारा) के साथ रहती है, साथ में रूममेट रीतु भी है जो उसके साथ
ही ऑफिस में काम करती है-
सुबह सुबह– सारा आईएम गेटिंग
लेट वील यू वेक अप… डोर तो बंद कर लो
हम जा रहे हैं कितना सोती है ये लड़की,
सारा- ओ गॉड जाओ न मुझपर कौन सा एहसान कर रही हो, चैन से सोने तो देती नहीं,
तुम दोनों निकलों मैं बंद कर लूंगी
धरा – अभी बंद करो मुझे
पता है तू फिर सो जाएगी आलसी कहीं की कोई आ गया न..
सारा- ओ मां कहां से मैं यहां रहने आ गई जाओ जाओ.... दरवाजे तक आती है
आंख मलती हुई, ओके बाय, हां नींद गायब हो गई है महारानी की(धरा- रीतु) रीतु- बाय
सारा.,, दीदी बाय..
धरा ओके बॉय टेक केयर
रास्ते में चलते हुए दोनों आपस में बाते करती हैं रीतु अपने
बॉयफ्रेंड(राजीव) के बारे में बताती है, जो नोएडा में रहता है और उसके साथ पहले
वाली कंपनी में काम करता था जहां वो रिसेप्सनिस्ट का काम करती थी, पता है धरा
राजीव कहता है आजकल बीजी हो गया है लेकिन मुझे पता है झूठ बोलता रहता करता होगा
फलर्ट किसी ऑफिस स्टाफ से मुझे बेवकूफ समझा है। मैने कहा चलो संडे को फिल्म देखने
चलते हैं तो कहता है अरे यार रियली सॉरी ऑफिस में बहुत काम है इसलिए संडे को भी
जाना पड़ेगा प्लिज नेक्स्ट संडे चलेंगे।
धरा- तो क्या हुआ होगा बहुत काम इसमें झूठ क्या है तू भी खाम म खा शक
करती रहती है
रीतु- तुझे क्या पता है लड़के कितने चंटू होते हैं मासूका पास है पर
नजरें किसी और हसीना को तलासती हैं..
मेट्रो आ जाती है.-.. धरा- चल जल्दी, रीतु अरे रूक मैने कार्ड में पैसे
नहीं हैं ..धरा अंदर चली जाती है , रीतु पैसे डलवा कर आती है, अरे यार देखा तूने
उस लड़के को
ध- किसे
र- वही जो उस साइड गया
ध – नहीं
र- बस मिस कर दिया, कितना स्मार्ट था
ध हू बताऊ (मोबाइल दिखाते हुए) क्या राजीव को
र- हू तो क्या वो करे तो रास लीला मैं करू तो कैरेक्टर ढीला...
ध- अच्छा चल जल्दी नहीं तो आज भी प्रसाद मिलने वाला है...
(दोनों मेट्रो में सवार होती हैं , मेट्रो ठचाठच भरी हुई हुई इसलिए कंफरटेबल
जगह के लिए दोनों आगे बढ़ती हैं धरा पीछे ही रह जाती है और रितु एक आगे वाली डब्बे
में चली जाती है,,
रीतु मोबाइल से धरा को कंटेक्ट करती हुई... अरे यार वो हैंडसम इसी मेट्रों में मेरे सामने है तू
कहां रह गई
ध- स्टेशन पे
री. क्या
ध. क्या क्या, कर रही है खुद आगे आगे भार गई मैं यहीं भीड़ में अटकी हूं
री. सॉरी यार अब तू सीधे आ जा फिर देख मैं दिखाती हूं...
ध. मैं नहीं हिलने वाली, यहीं रहूंगी
री. लड़क को देखते हुए मैं भी नहीं हिलने वाली, क्या, हां ठीक है न तू वहीं रह वैसे भी बहुत भीड़ है...
डेस्टिनेशन से पहले वाले स्टेशन पर थोड़ी जगह खाली होती है, धरा आगे
बढ़ती है लड़के के साइड से होकर जाती है
उसका बैग उसके बैग की चेन में अटक जाता है... सॉरी .. सॉरी दोनों की आवाज सेक्टर
16 की आवाज आती है धरा फटाक से अपना बैग चेन से छुड़ाती है और बाहर निकल आती है
री. बड़ा मुझे पांचाली बोलती है खुद उसके बैग में उलझी हुई थी सावित्री
जी
ध. क्या,
री.- और नहीं तो क्या ..जिससे उलझी थी आप मैडम वही तो था वो स्मार्टी
ध. अरे मैने तो उसे ध्यान से देखा भी नहीं...
री.—मुझे पता है निरस
तू ऐसी ही है काश मैं उलझी होती...
ऑफिस का माहौल गर्म..बॉस गुस्से में
सपना – आहा आ गई हॉल्विन्स
की महारानियों...
ध. – क्या हुआ माहौल
बडा शांत सा है...
सपना- होगा कैसे नहीं हॉल्विन्स के महाराजाधिराज गुस्से से आग बबुला हुए
घूम रहे हैं..अब उनके सेक्रेटरी ने
प्रपोसल नहीं भेजा तो इसमें हमारा क्या दोष विषैले नाग की तरह हमपर फूफकार मार रहे
हैं...
आकाश- चुप हो सपना रानी नाग आ रहा है..
सभी चुप अपने चैंबर में बैठे हुए
बॉस(अमन वर्मा) सभी के बीच में आकर, मनिष के प्रपोसल न भेजने की वजह से
हमें करोड़ों का नुकसान हो गया है, उसे तो मैं आउट करूंगा ही रेणुका(एचआर) उससे
पहले तुम मेरे लिएकोई बढ़िया सेकरेट्री ढूंढ लेना...
(बॉस के जाते ही , ऑफिस मछली बाजार) मनिष की क्या गलती है, बेचारे की मां
का अचानक एक्सीडेंट हो गया, अचानक उसे घर जाना पड़ा, ये नागराज न किसी की मुसिबत
नहीं समझता...
सब अपने काम में लग जाते हैं..
घर—रीतु कितने अजीब
हैं न अमन सर उन्हें एक बार मनिष से पूछना तो चाहिए था न, - धरा
री. अरे मुझे ये नाग पहले दिन से जहरीला लगता है..
सारा- क्यों गप्पियों खाना नहीं खाना आज गप से ही पेट भरना है क्या
ध.-ये एक दिन कुछ बना क्या लेगी खुद वल्ड सुपर सेफ समझने लगती है ..दूसरा
दिन ऑफिस के लिए मेट्रो में सवार
आज मेट्रो तो बहुत खाली है- धरा
होगा क्यों नहीं आज नाग पंचमी है हमें तो ऑफिस के नाग की पूजा करने लिए जाना ही होगा- री
ऑफिस का हेक्टिक वर्क वापस लौटते वक्त थोड़ी देर हो जाती है साथ में आकाश
भी है (जो कभी कभार ही मेट्रो से सफर करता है, आज उसने छुट्टी ले रखी है...धरा और
आकाश की अच्छी जमती है, इसलिए रीतु के होने के बावजूद दोनों बातों में मशगूल हैं) धरा
तुम्हें पता है दिल्ली में क्या कुछ देखने लायक है, आईमिन अगर तुम्हें एक पूरा दिन
दिल्ली दर्शन के लिए भेज दिया जाय तो तुम क्या देखना चाहोगी।
धरा- अ...पर तुम ये क्यों पूछ रहे हो
आकाश – अरे बाबा अब
तुम्हें ये सोचने में भी इतना टाइम लगेगा, और क्यों क्या, यूं ही पूछ रहा हूं, अभी देखना रीतु से पूछता हूं
कैसे टपाटप जवाब देती है, रीतु रीतु,
रीतु- हो गया तुम दोनों का, जो मुझे जेकपोट आनसर के लिए बुला लिया,
अ-
अच्छा तो तुम सुन रही थी .. हां तो क्या कान में
रूई पड़ी है जो नहीं सुनुंगी, अच्छा तो चल बता न....
रीतु- अगर मुझे एक पूरा दिन घूमने को मिले तो मैं राजीव के साथ एक पूरा
दिन मुगल गार्डन में बिताउगी,
अ- ओ हो वाह गुड मुझे नहीं पता था तुम बड़बोली के साथ साथ इतनी रोमांटिक
भी हो.. ओके गर्लस बाय मेरा स्टेशन आ गया।
ध. तू न किसी से भी कुछ भी बोलती रहती है , क्या, अब उससे ये बात कहने की
क्या जरूरत थी, क्या कहा जो पूछा उसी का जवाब दिया अब तू तो बोल सकती नहीं तो
मैंने ही कह दिया ।
(ऑफिस से घर आती हैं..)
सारा- आगई मेरी पूज्यणीय दीदीयों पानी लाऊं आपके चरण कमल धोने के लिए,
स. नहीं जजमान धन्यवाद, पेट की तृष्णा को शांत करने के लिए थोड़ा भोजन दे
दिजिए...हा हा हा
ध. आकाश की पिछली कुछ दिनों की बातों को याद करते हुए, ( आकाश जब पहले
दिन ही ऑफिस आया था तो धरा से सबसे पहले इंट्रोड्यूज कराया गया था, ये हैं हमारे
ऑफिस की सबसे होनहार और मेहनती स्टाफ, धरा जी आप कहां से आती हैं, धरा जी नेहरू प्लेस
कहां है आपको पता , पता नहीं कब धरा जी आकाश के लिए धरा हो गई एक दिन जब पूरा ऑफिस
किसी बात पर गप्पेमार कर हंस रहा था तो आकाश बड़े गौर से धरा को देख रहा था , उसे ये सबकुछ थोड़ा अटपटा लग
रहा था लेकिन वो कुछ बोल नहीं पाई थी वैसे आकाश धरा को भी अच्छा लगता था, आज फिर
से आफिस में आकाश ने धरा से बाहर घूमने जाने के बारे में लेकिन तभी री. आ गई और ये
प्राइवेट बात सार्वजनिक हो गई । 6 ऑफिस स्टाफ ने मिलकर बाहर जाने की योजना बनाई ।
दो दिन के टूर पर सब शिमला जाने को तैयार हुए
सफर करते हुए आकाश धरा के सामने वाली सीट पर बैठा था-
धरा - वाह कितनी खूबसूरत वादियां हैं,
आकाश- बिल्कुल तुम्हारी तरह ( इन चार दिनों में खूब मौज मस्ती होती है)
वापस आते वक्त रास्ते भर धरा आकाश के बारे में सोचती आती है और उसके प्रति आकर्षण
महसूस करती है।
एक महिने ऐसे ही मेट्रो में आते जाते वो लड़का अब अक्सर दिखता था रीतु और
धरा दोनों उसे नोटिस करती थी हालांकि कुछ बोलती नहीं थी ,
ऑफिस में इंक्रिमेंट – एच आर , अनाउसमेंट, ऑफिस के कुछ स्टाफ की सेलरी में इंक्रिमेंट होना तथा
कई लोगों की पोस्ट भी चेंज हो सकती है, आकाश को ऑफिस का एमडी बना दिया गया है, रश्मी
को सीइओ की पोस्ट दी गई है, ... सब धरा की तरह देख रहे होते हैं सभी को पता था कि
धरा को भी जरूर को ऊंचा पोस्ट दिया जाएगा
पर ऐसा कुछ नहीं होता है।आकाश को रश्मी को धरा कांग्रेचुलेट करती है पर आकाश उसे आज
वैसे ट्रिट नहीं करता जैसे करता था उसे बुरा लगता है।
कंपनी के डा. – आकाश मेरी नजर
तुमपर कई दिनों से थी वैसे तो मुझे तुम्हारा काम पसंद था पर तुमने मुझसे ज्यादा
मेरी बेटी को इंफ्लूएंस किया, जी, हां रश्मी मेरी बेटी है और वो तुम्हे पसंद करती
है तुम ...जी मुझे नहीं मालूम था कि वो आपकी बेटी है, वैसे मैं भी मुझे भी उनका
स्वभाव पसंद है, तुम्हारे घर में कौन कौन जी मेरा बड़ा भाई है , ठीक है कल तुम
उन्हें हमारे घर पर खाने पर ले आना। जी बहुत अच्छा , निकलते वक्त रश्मी मिलती है
दोनों एक दूसरे को देखर मुस्कुराते हैं।
आकाश फोन पर भाई- भाई मुझे कंपनी का एमडी बना दिया गया है, अरे कंग्रेटस
यार, और कल मेरे बॉस ने खाने पर बुलाया है, वाह क्या बात है, वो अपनी वो अपनी बेटी
से मेरी शादी करना चाहते हैं, क्या पर तुम तो धरा को पसंद करते हो न, करता था,
क्या, हां मैने जब ऑफिस ज्वाइन किया था तो वो मुझे मेरी तरक्कि की सीढ़ी लगती थी
लेकिन शिमला टूर के दौरान जब मुझे पता चला
की रश्मी हमारे ऑफिस की कोई ऑर्डिनरी इमप्लाई नहीं बल्कि ऑनर की बेटी है तभी से
मैने ठान लिया था मुझे रश्मी को इंप्रेस करना है, लक तो देख यार धरा जिसे में
पिछले 6 महिनों से पटाने में लगा था उसके तरफ से तो कुछ रिप्लाई आया नहीं, तीन
महिने में ही रश्मी ने मुझे फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया, क्या तो तुम धरा से
प्यार नहीं करते नहीं या र मुझे तो जल्द से जल्द तरक्कि चाहिए थी अब तरक्कि की
सीढी धरा बने या रश्मी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, वो मेरे फैमिली के लिए पूछ रहे
थे तो मैने सोचा मेरा यार तो मेरी मदद करेगा ही इसलिए मैने कह दिया की एक बड़ा भाई
है... तो आ रहा है न तू कल... फोन बीच में कट जाता है ...
सुबह आ.—अरे यार कल फोन
क्यों नहीं उठाया आ रहे हो न .... हां .देखता हूं ऑफिस में आज ज्यादा काम है अरे
छोड़ ऑफिस अब अपने दोस्त के ऑफिस में रइशों की तरह काम करना....
रीतु का ऑफ है वो सारा के साथ शॉपिंग पर जाने वाली है..
मेट्रों—आज धरा अकेले ऑफिस
जा रही है.. उसे पिछले तीन महिनों में आकाश के उसे इगनोर किए जाने की सारी बातें
याद आती हैं उसके पैर मेट्रो से नीचे नहीं पड़ रहे हैं सेक्टर 16 के एक स्टेशन पहले
ही वह उतर जाती है स्टेशन के नीचे झांकती हुई उसकी आंखों आंसू टपकने लगती हैं मन
में कुछ ठान कर वो रेलिंग पर चढ़ने को होती है तभी पीछे से आवाज आती है एक्सक्यूजमी... एक्सक्यूजमी.... पीछे से
दौड़ता हुआ कोई आता है क्या आपको पता है ....ये कंपनी कहां है आंसू पोछ कर धरा
पछे पलटती जैसे किसी ने उसकी चोरी पकड़ ली हो जी मैने पूछा .... कहां है आपको पता
है .... ये वही लड़का है जो अक्सर मेट्रो में दिखता था और जिसे देखकर पहली नजर में
ही रीतु लट्टू हो गई थी।
जी मुझे नहीं मालूम, मिस धरा आप तो वहीं काम करती हैं न... जी ... आपको
मेरा नाम कैसे मालूम है जी मेट्रो में आपकी फ्रेंड के मुंह से सुना था पर आपको ये
कैसे मालूम की मैं वहां काम करती हूं ... जी आप प्लिज मुझे अपने ऑफिस ले चलिए...
(लड़के का नाम क्षीतिज है जो आकाश का दोस्त है ...)
दोनों ऑफिस पहुंचते हैं ...
आकाश का सच सबके सामने आता है और क्षीतिज धरा को परपोज करता है...
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